Snapshot of News Published in Dainik Jagran, Dhampur edition on 16/04/2018

अंत्योदय से भारत उदय भाजपा का लक्ष्य

पश्चिमी उ.प्र. से कभी अपनी सियासी पारी शुरू करने वाले अशोक कटारिया की सांगठनिक क्षमता से अब पूरा प्रदेश परिचित हो चुका है। यद्यपि अभी उनके हस्ताक्षर की स्याही थोड़ी गीली है किन्तु लिखावट बता रही है कि शिल्प बेमिसाल है। मुरादाबाद, बरेली और मेरठ में छात्र राजनीति से सियासी सफर शुरू करने वाले अशोक कटारिया की गिनती यूपी के भाजपा संगठन के तेज तर्रार नेताओं में होती है। संघ से जुड़ा रहने की वजह से उन्हें वैचारिक रूप से भी मजबूत माना जाता है। शायद इसी कारण भाजपा ने संघ की नर्सरी का प्रोडक्ट माने जाने वाले फायर ब्रांड नेता अशोक कटारिया को प्रदेश महामंत्री जैसे महत्वपूर्ण पद से नवाजा है। पश्चिम के जिलों से वह अकेले नेता हैं जिन्हें यह महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी गई है। अशोक कटारिया ऐसी जुझारू सियासी शख्सियत हैं जो युवा हैं, ऊर्जावान और कुशल वक्ता भी हैं, जिसमें पं. दीनदयाल उपाध्याय के सपने को साकार करने का जुनून है तो ‘उत्तर प्रदेश को उत्तम प्रदेश बनाने की हसरत भी। प्रस्तुत हैं अशोक कटारिया, महामंत्री, उ.प्र. भाजपा से सियासत के प्रासंगिक विषयों पर स्थानीय सम्पादक प्रणय विक्रम सिंह की खास बातचीत के प्रमुख अंश।

सवाल- भारत की संसदीय राजनीतिक व्यवस्था में अनेक विचारधारा की सियासी जमातें सक्रिय हैं। आपके अनुसार भारतीय राजनीतिक जगत में बहैसियत राजनीतिक दल भाजपा का क्या लक्ष्य है?

जवाब- बीजेपी की स्थापना में ही पांच निष्ठाएं तय की गई हैं और उन निष्ठाओं में से एक निष्ठा है समतामूलक समाज की स्थापना करना। जहां समानता हो किसी के साथ भेदभाव न हो। पं. दीनदयाल उपाध्याय ने भाजपा के सामने अंत्योदय से भारत उदय का लक्ष्य रखा है। भाजपा ‘सबका साथ, सबका विकास में विश्वास करती है और भाजपा में सभी वर्गों का प्रतिनिधित्व होता है। सहजीवन, सहअस्तिव और सहकार की भावना के साथ अंत्योदय से भारत उदय भाजपा का लक्ष्य है।

सवाल- अंत्योदय क्या है? विस्तार से बताएं?

जवाब- समाज के आखिरी छोर पर बैठा व्यक्ति हमारी आराधना का केन्द्र होना चाहिए, उसका उत्थान ही समाज के बलवान होने की कसौटी है। समाज के आखिरी व्यक्ति के कल्याण का प्रतिबद्ध विचार है अंत्योदय। यही दीनदयाल उपाध्याय के अंत्योदय की परिभाषा है। मुझे हर्ष है भारतीय जनता पार्टी दीनदयाल उपाध्याय के दिखाये मार्ग पर चल रही है। दलित, शोषित, वंचित, किसान, ये सब भाजपा के लिए राजनीतिक नारे नहीं हैं बल्कि इनका उत्थान भाजपा का कमिटमेंट है। जब हम सबका साथ-सबका विकास का नारा लगाते हैं तो उसमें सम्पूर्ण समाज को अपनाने का भाव समाहित होता है। यही अंत्योदय है। थोड़ा और विस्तृत फलक पर देखें तो कह सके हैं कि हम इस चराचर ब्रह्माण्ड या पृथ्वी पर आधारित रहें, इसका दोहन नहीं बल्कि पुत्रभाव से उपयोग करें किन्तु इससे प्राप्त संसाधनों को मानवीय आधार पर वितरण की न्यायसंगत व्यवस्थाओं को समर्पित करते चलें, यह अंत्योदय का प्रारम्भ है। अंत्योदय का चरम वह है जिसमें व्यक्ति, व्यक्ति से परस्पर जुड़ा हो और निर्भर भी अवश्य हो किन्तु उसमें निर्भरता का भाव न कभी हेय दृष्टि से आये और न कभी देव दृष्टि से। इस प्रकार का अंत्योदय का भाव प. दीनदयाल उपाध्याय के एकात्म मानववाद के सह उत्पाद के रूप में जन्मा जिसे सह उत्पाद के स्थान पर पुण्य प्रसाद कहना अधिक उपयुक्त होगा।

सवाल- उत्तर प्रदेश जैसे बड़े सूबे में आपकी पार्टी की सरकार है। किन्तु कार्यकर्ताओं की शिकायत है कि उनकी बात अधिकारी नहीं सुनते। क्या सरकार बनते ही पार्टी कार्यकर्ताओं को भूल गई? क्या कहेंगे आप?

जवाब- देखिये, मैं संगठन का व्यक्ति हूं। मैं सरकार का हिस्सा नहीं। किन्तु एक आम कार्यकर्ता की हैसियत से आपको बताना चाहंूगा कि सही बात सबकी सुनी जा रही है, उ.प्र. की वर्तमान सरकार में। बीजेपी, समाजवादी पार्टी की तरह नहीं है, जहां पहले पिता मुख्यमंत्री बनता है, फिर पुत्र बनता है उसके बाद पोता मुख्यमंत्री बनेगा। सपा में सिर्फ एक ही परिवार का प्रतिनिधित्व है। और भाजपा कार्यकर्ता आधारित दल है। यहां कार्यकर्ताओं का प्रतिनिधित्व होता है। भाजपा सरकार का ध्येय वाक्य है सबका साथ-सबका विकास। फिर इस कसौटी पर कार्यकर्ता क्या, विरोधी क्या। सभी अपने हैं, सभी का विकास हो, ऐसा सरकार का प्रयास है।

सवाल- उ.प्र. सरकार के छह माह पूर्ण हो चुके हैं। क्या यह सरकार जनता की अपेक्षाओं पर खरी उतर पाई है?

जबाव- छह माह की अवधि किसी भी सरकार के मूल्यांकन के लिए अत्यन्त न्यून अवधि है। ध्यातव्य है कि उ.प्र. में विगत डेढ़ दशक से चल रहे अन्धकार युग के कारण प्रदेश में रीति-नीति और पद्यति ध्वस्त हो चुकी थी। कानून का इकबाल अपराधियों की चरण वंदना कर रहा था तो भ्रष्टाचार विगत सरकारों (सपा और बसपा) की पहचान बन चुका था। ऐसे अन्धकार युग के पश्चात सिर्फ छह माह पूर्व सत्ता में आई भाजपा सरकार के प्रयासों से कानून-व्यवस्था से लेकर सरकार की कार्य संस्कृति तक में जो सकारात्मक परिवर्तन परिलक्षित हो रहा है, वह एक सफल, प्रेरणास्पद सरकार की नींव रखता है। सरकार ने बीते 15 वर्ष से चल रही परिवारवाद व जातिवाद की राजनीति को खत्म कर युवा, किसान और विकास केन्द्रित राजनीति की शुरुआत की है। इन छह महीने में जहां उद्योगों में निवेश का फ्रैंडली माहौल बना है वहीं जंगलराज के खात्मे के साथ ही कानून का राज स्थापित हुआ है। बीते छह महीने में प्रदेश में एक भी दंगा न होना भी एक रिकार्ड है। आपको जान कर हर्ष होगा कि प्रदेश में एक लाख 53 हजार से ज्यादा ऐसे मामले आये हैं जहां सरकारी भूमि या अन्य जमीनों पर दबंगों ने जबरन और राजनीतिक संरक्षण में कब्जा किया है किन्तु सरकार ने ऐसे कब्जों को सूचीबद्ध करना शुरू किया है और इस पर बड़ी कार्रवाई होने जा रही है। किसानों की ऋण माफी से लेकर रोजगार की नयी सम्भावनाओं के विकास ने अच्छे दिनों का क्रान्तिकारी आगाज दिखा दिया है। विश्वास है कि जब आगाज क्रान्तिकारी है तो अंजाम भी ऐतिहासिक होगा।

सवाल-निकाय चुनावों को लेकर आपकी क्या तैयारियां हैं?

जवाब-हम भाजपा के कार्यकर्ता लोकसभा ओर विधानसभा चुनाव में जनता से वोट लेने के पश्चात अन्य दलों की तरह सत्ता सुख में बैठे नहीं बल्कि राजनीति के साथ-साथ सामाजिक सरोकारों से जुड़ते हुए रक्तदान और वृक्षारोपण जैसे कार्यक्रमों को लेकर जनता के बीच में गये, साथ ही सभी समाज के वर्गों को लेकर हमने कार्यक्रम किये। अब हम निकाय चुनाव में समग्र विकास के नारे को लेकर जनता के बीच जायेंगे। पंडित दीनदयाल जी का सपना साकार करने हेतु भाजपा का जो लक्ष्य है कि पंक्ति में बैठे अन्तिम व्यक्ति के चेहरे पर चमक लाना है, की प्राप्ति हेतु केन्द्र्र और प्रदेश में सरकार बनने के बाद हमारी कोशिश है कि नगर निगम और नगर पालिकाओं में हमारी विचारधारा के लोग आएं। इसकी तैयारी संगठन के स्तर पर जोरों से चल रही है। हम प्रदेश सरकार की नीतियों को लेकर जनता के बीच जायेंगे और निकाय चुनावों को जीत कर ही दम लेंगे।

सवाल- यदि जातीय आधार पर देखा जाये तो भाजपा की सियासी रणनीति पिछड़ा वर्ग केन्द्रित दिखाई पड़ती है। आप भी पिछड़ा वर्ग से ताल्लुक रखते हैं। पिछड़ा वर्ग समुदाय को भाजपा से क्या अपेक्षाएं हैं?

जवाब- देखिये, भाजपा जाति आधारित पार्टी नहीं है। भाजपा जैसी विचार आधारित पार्टी में जाति जैसे विकार के लिए कोई स्थान नहीं है। आप यहां जाति विभाजन के आधार पर किसी भी योजना अथवा कार्य का निर्धारण और मूल्यांकन नहीं कर सकते। हां, वैधानिक व्यवस्था के अनुसार जातीय आधार पर पिछड़ेपन के कारणों को चिन्हित कर उन्हें दूर करने हेतु सतत् प्रयत्नशील रहना हमारा उद्देश्य अवश्य है। और शायद प्रत्येक समुदाय यही अपेक्षा रखता है।

सवाल- आप पब्लिक सत्ता न्यूज़ पोर्टल के माध्यम से हमारे पाठकों को क्या संदेश देना चाहेंगे?

जवाब- हमारा उत्तर प्रदेश, राष्ट्र का सबसे विशाल प्रदेश है। यहां चुनौतियां हैं तो सम्भावनाएं भी असीमित हैं। यदि जातिवाद और व्यक्तिवाद को त्याग कर एकमत होकर सकारात्मक मन:स्थिति और कुशल नियोजन के साथ कार्य किया जाए तो उत्तर प्रदेश को उत्तम प्रदेश बनने में बहुत समय नहीं लगेगा, ध्यान रहे कि सबसे बड़ा उपभोक्ता प्रदेश भी यूपी ही है। गाजियाबाद से गाजीपुर, सहारनपुर से सिद्धार्थ नगर तक सबका साथ-सबका विकास भाव के जागरण से सकारात्मक परिवर्तन के नये द्वार खुलेंगे। मैं पार्टी कार्यकर्ताओं से कहना चाहूंगा कि अपने दैनिक जीवन कार्य संस्कृति में ‘नेशन फर्स्ट, पार्टी सेकेण्ड, सेल्फ लास्ट’ के मंत्र को अंगीकार करें ताकि प्रदेश में एकात्म भाव जाग्रत हो और प्रदेश और राष्ट्र परम वैभव को प्राप्त हो सकें।

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जो देश के नहीं काम का, वह मेरे किस काम का ...